सीहोर
सीहोर में महादेव की होली गुरुवार को शुरू हो चुकी है। काशी, मथुरा और बरसाना की तर्ज पर यहां पर फूल-गुलाल से होली खेली जाएगी। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पहले सीवन नदी किनारे होली खेली जाती थी। नबाव साहब ने इसे बंद करा दिया था, अब हमने फिर से शुरू किया।
उन्होंने कहा भगवान शिव के स्वरूप को सब जानें कि उनकी भक्ति का रंग अजर-अमर है। इजराइल-अमेरिका, ईरान में चल रहे युद्ध पर भी कथावाचक ने कहा कि
किसी न किसी कारण से देश बर्बाद हो रहे हैं। सारे राष्ट्र में अब शांति हो यह युद्ध अब समाप्त होना चाहिए। सब पर बाबा देवाधिदेव महादेव की कृपा बनी रहे। भारत का एक-एक नागरिक प्रार्थना करता है कि सभी जगह पर शांति हो।
फूल-गुलाल से खेली जाती है होली इस होली की खास बात यह है कि इसमें केवल गुलाल और फूलों का उपयोग किया जाता है। पानी या पानी में घुले रंगों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। इसका उद्देश्य यह है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को वापस घर लौटते समय किसी तरह की असुविधा न हो।
पांच शिव मंदिरों में खेली जाती है होली महादेव की होली शहर के छावनी स्थित चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर विभिन्न शिव मंदिरों से होती हुई आगे बढ़ती है। इसके बाद यह गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, पिपलेश्वर महादेव मंदिर और नर्मदेश्वर महादेव मंदिर होते हुए प्राचीन मनकामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचती है। यहां विशेष आरती के साथ आयोजन का समापन किया जाता है।
शिव और गुरु के साथ होली का संदेश पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार यह होली शिव और गुरु के साथ खेली जाती है, जो यह संदेश देती है कि बड़ों के सानिध्य में जीवन खुशियों के रंगों से भर जाता है। उनका कहना है कि शिव ही ऐसे हैं जिनका रंग एक बार चढ़ जाए तो जीवन भर नहीं उतरता।
देशभर के श्रद्धालुओं को किया आह्वान पंडित मिश्रा ने देशवासियों से अपने-अपने शिव मंदिरों में भगवान शिव को चंदन युक्त जल अर्पित करने का आह्वान किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि महादेव की होली उत्साह के साथ लेकिन पूरी शांति और अनुशासन के साथ मनाएं।

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