January 15, 2026

मकर संक्रांति से पहले गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू

गोरखपुर
मकर संक्रांति 2026 को लेकर लोगों में भ्रम था कि इसे 14 जनवरी को मनाया जाए या फिर 15 जनवरी को। ज्योतिषाचार्यों ने भ्रम की इस स्थिति को खत्म करते हुए बता दिया है कि सूर्य 14 जनवरी यानी आज रात 9 बजकर 35 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार संक्रांति का पर्व उदया तिथि के आधार पर यानी अगले दिन 15 जनवरी को मान्य होगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में होने वाला सार्वजनिक अवकाश भी 14 जनवरी के स्थान पर 15 जनवरी कर दिया है। लेकिन इस बीच 14 जनवरी को तड़के चार बजे गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर सदियों पुरानी परंपरा जीवंत हो गई। ब्रह्ममुहूर्त में जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं ने बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करनी शुरू कर दी। एक दिन पहले मंगलवार से ही बिहार, दिल्ली सहित अन्य राज्यों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंच गए थे।
 
सुबह चार बजे से आठ बजे तक खिचड़ी चढ़ाने वालों की भारी भीड़ रही। इस दौरान मुख्य रूप से वे श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे, जो पहले से गोरखनाथ मंदिर परिसर में मौजूद थे। सुबह आठ बजे के बाद कुछ समय के लिए भीड़ में कमी आई, लेकिन दस बजे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या एक बार फिर तेजी से बढ़ गई। दरअसल, इस समय ट्रेन और अन्य साधनों से दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन लगातार अनाउंसमेंट करता रहा। श्रद्धालु सिंह द्वार पर खिचड़ी स्वरूप चावल अर्पित कर दर्शन के लिए आगे बढ़ते दिखे। भीड़ अधिक होने के कारण एक बार में 70 से 80 श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। फिलहाल पुरुष श्रद्धालुओं की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक देखी जा रही है।

गोरक्षपीठाधीश्वर कल तड़के चढ़ाएंगे खिचड़ी
इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ रही है। ऐसे में गुरुवार को विशेष उत्साह देखने को मिलेगा, जब तड़के सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की गई है। मंदिर समिति श्रद्धालुओं से अपील कर रही है कि खिचड़ी इधर-उधर न फेंकें। खिचड़ी अर्पित करने के बाद श्रद्धालु उत्तरी द्वार से बाहर निकलकर हनुमान मंदिर के पास से होते हुए पूरे परिसर का भ्रमण कर रहे हैं।