नई दिल्ली.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना संवाद 2026 में मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच ईरानी नौसैनिक पोत को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति देने के फैसले का बचाव किया है। जयशंकर ने ईरानी जहाजों से जुड़ी घटनाओं को लेकर कहा कि भारत ने यह कदम कानूनी जटिलताओं से ऊपर उठकर विशुद्ध रूप से मानवीय आधार पर उठाया है।
दरअसल, भारत की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिससे हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ईरान की ओर से मिला संदेश
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं।
1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें आने में कुछ दिन लग गए और फिर वे कोच्चि में रुके। उनमें कई युवा कैडेट थे। जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे, और फिर वे किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए।"
ईरानी जहाजों को लेकर टिप्पणी
बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की ये टिप्पणियां तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों के संदर्भ में आई हैं, जिनमें मार्च के पहले सप्ताह में ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के केंद्र में आ गए थे। ये जहाज- आईरिस डेना, आईरिस लवन और आईरिस बुशहर- हिंद महासागर में परिचालन कर रहे थे और फरवरी में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान 2026 अभ्यासों में भाग ले चुके थे।
मैनें जो किया वो सही…
विदेश मंत्री जयशंकर इस बात पर जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण मानवीय विचारों से प्रेरित है। जयशंकर ने कहा, "श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, उन्होंने वही फैसला लिया जो उन्होंने लिया और दुर्भाग्य से उनमें से एक की जान नहीं बच पाई… हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के नजरिए से इस स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।"
बताते चले के कि बीते 4 मार्च को, श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को निशाना बनाया गया था। इस हमले के कारण जहाज डूब गया। श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचा लिया गया और उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए गाले ले जाया गया।

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