आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी होती है। वह 'पापांकुशा' के नाम से जाना जाता है। वह सभी पापों को हरने वाली और उत्तम है। उस दिन संपूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिए स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाले पद्मनाभसंज्ञक मु वासुदेव का पूजन करना चाहिए। मूर्तिकार मुनि चिरकालतक कठोर तपस्या करके जिसका फल प्राप्त करता है, वह उस दिन भगवान गरुड़ध्वज को प्रणाम करने से ही मिल जाता है। पृथ्वी पर तीर्थ तीर्थ और पवित्र देवालय है, उन सबके सेवन का फल भगवान विष्णु के नाम कीर्तन से मनुष्य को प्राप्त होता है। जो शारंगधनुष धारण करने वाले सर्वव्यापक भगवान जनार्दन की शरण में जाते हैं, उन्हें कभी यमलोक की यात्रा नहीं मिलती। यदि कार्य प्रसंग से भी मनुष्य केवल अन्य तृतीय पक्ष को उपवास कर ले तो उसे कभी यम यातना नहीं होता।
पुरुष विष्णुभक्त भगवान शिव का निन्दा करता है। वह भगवान विष्णु के लोक में स्थान नहीं पाता, उसे ही नर्क में गिरना बताता है। इसी प्रकार यदि कोई शैव या पाशुपत भगवान विष्णु को निन्दा करता है तो घोर वह नरक में नरक में तब तक भस्म हो जाता है। जब तक कि 14 इंद्रों की उम्र पूरी नहीं हो गई। यह मोक्ष स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली, शरीर को निरोग बनाने वाली और सुंदर स्त्री, धन एवं मित्र देने वाली है। राजन । एकादशी के दिन उपवास और रात में जागरण करने से अनायास ही विष्णु धाम को प्राप्त होता है। राजेंद्र। वह पुरुष मातृ-पक्ष की दसवें पक्ष की ओर से दसवें वर्ष का स्थान देता है। श्राद्ध व्रत करने वाले मनुष्य दिव्यरूपधारी, चतुर्भुज, गरुड़की ध्वज से युक्त हार से मुशोभित और पीतांबरधारी सितारे भगवान विष्णु के धामको जाते हैं।
आश्विन के शुलक पक्ष में पापांकुशा का व्रत करने से ही मानव सभी पापों से मुक्त होकर हरि के लोक में जाता है। जो पुरुष सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, वस्त्र और चाटे का दान करता है, उसे कभी यमराज नहीं देखते। नृपश्रेष्ठः। दरिद्र पुरुष को भी चाहिए कि वह यथाशक्ति खानदान आदि क्रिया करके अपने हर दिन को सफल बनाए। जो घर, स्नान, जप, ध्यान और यज्ञ आदि पुण्यकर्म करने वाले हैं, उन्हें भयंकर यमायतना नहीं देखनी चाहिए। लोक में जो मानव दीर्घायु, धनाढ्य, कुल्लिन और दीर्घायु देखते हैं, वे पहले के पुण्यात्मा हैं। पुण्य कर्ता पुरुष ऐसे ही देश जाते हैं। इस विषय में अधिक वर्णन से क्या लाभ है, मनुष्य से पाप से दुर्गति में चित्र हैं और धर्म से स्वर्ग में जाते हैं। राजन! आपने जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार पापांकुशा का महात्म्य मैंने वर्णित किया था: अब और क्या कथन हो?

More Stories
हिंदू नववर्ष 2026: कौन सा संवत होगा शुरू और आपके जीवन पर क्या पड़ेगा असर?
पंचक-खरमास के बीच होगी नवरात्रि कलश स्थापना, जानें कितना मिलेगा शुभ मुहूर्त
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा की चौकी किस दिशा में रखें? जानें सही वास्तु नियम