शनि ग्रह का गोचर और उनकी अन्य ग्रहों के साथ युति किसी व्यक्ति के जीवन में तमाम पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालती है. इसमें स्वास्थ्य, रिश्ते और आर्थिक स्थिति भी शामिल है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि लगभग ढाई वर्ष तक एक राशि में रहते हैं. प्रख्यात ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी ने इस अवधि के दौरान शनि के साथ अन्य ग्रहों की युति होने पर पड़ने वाले प्रभावों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी दी है.
उनका कहना है कि ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब शनि अकेले प्रभाव में होते हैं, तो इससे गठिया रोग, तंत्रिका संबंधी कमजोरी, कमजोरी, पक्षाघात, गुर्दे और यकृत की विफलता, अस्थमा, श्वसन संबंधी समस्याएं, निमोनिया, तेज बुखार, बेहोशी, बालों का झड़ना, अपच और व्यसनों की ओर झुकाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. जब अन्य ग्रह शनि के साथ युति बनाते हैं तो भी तमाम तरह के विशिष्ट प्रभाव पड़ते हैं. आइए जानते हैं कि किस ग्रह के साथ युति बनाने पर कौन-कौन समस्या हो सकती है?
शनि और सूर्य की युति
जब सूर्य और शनि एक साथ युति में होते हैं, तो शरीर में कमजोरी, दृष्टिहीनता, सुस्ती और उत्साह की कमी होती है. वरिष्ठों से परेशानी, ससुर या ससुर से दूरी या उनकी बीमारी की चिंता, अत्यधिक खर्च और मानसिक शांति का ह्रास हो सकता है.
शनि और चंद्रमा की युति
जब चंद्रमा शनि के साथ युति बनाते हैं तो मतिभ्रम, सीने में दर्द, एनीमिया, चेहरे की चमक में कमी, चेहरे पर मुंहासे, सुस्ती और रुचि की कमी हो सकती है.
शनि और बुध की युति
जब बुध और शनि एक साथ युति में होते हैं तो हकलाना, त्वचा रोग, कान में दर्द और कान से स्राव जैसी समस्याएं हो सकती हैं. छोटे बच्चों के लिए बुध को शांत कराना उचित होता है.
शनि और बृहस्पति की युति
जब बृहस्पति और शनि एक साथ युति में होते हैं तो पाचन संबंधी समस्याएं, अत्यधिक बुद्धि, अजीब व्यवहार, स्मृति हानि और भोजन के प्रति उदासीनता हो सकती है.
शनि और शुक्र की युति
जब शुक्र और शनि एक साथ युति में होते हैं तो गले में खराश, प्रतिभा में कमी, टॉन्सिल की समस्या, बवासीर और छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
शनि और राहु की युति
जब राहु शनि के साथ युति में होते हैं तो जहर, बांझपन और हड्डियों में दर्द का डर हो सकता है. साथ ही, यह डर भी हो सकता है कि खाया गया भोजन जहर में परिवर्तित हो जाएगा.
शनि और केतु की युति
जब केतु शनि के साथ युति में होते हैं तो इससे रक्तचाप (बीपी), रक्त संबंधी समस्याएं और शरीर में हर तरह का दर्द हो सकता है.
गुरुजी ने सलाह दी है कि ज्योतिष से संबंधित इन सभी समस्याओं के लिए चिकित्सा उपचार के साथ-साथ संबंधित ग्रहों की शांति पूजा करना जरूरी है.

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