घर में बरकत लाने के कई फैक्टर होते हैं। उन कई फैक्टर्स में से एक फैक्टर है घर में किचन। घर का जो अग्नि कोण है यानी साउथ और ईस्ट के बिल्कुल बीच वाला पोर्शन जिसको साउथ-ईस्ट बोला जाता है वो घर में रसोई बनाने का सबसे शुभ स्थान वास्तुशास्त्र के मुताबिक माना जाता है लेकिन क्या यह बात हमारे जीवन में सचमुच अप्लाई होती है ?
साउथ-ईस्ट की किचन माना जाता है हमारे जीवन में बरकत देती है, हमारे लॉसेस को कम करती है। ये चीज एक पार्ट तक सही है लेकिन ये चीज कंप्लीट सही नहीं है क्योंकि वास्तु असल में हमारी जन्म कुंडली को रिस्पॉन्ड करता है। वास्तु किसी शून्य को रिस्पॉन्ड नहीं करता है। उस घर में रहने वालों की जन्म कुंडलियों को वास्तु अपने-अपने तरीके से से रिस्पॉन्ड करता है। मान लीजिए घर में चार या पांच लोग रहते हैं और उस घर का वास्तु उन चारों पांचों लोगों को अलग-अलग तरह से रिस्पॉन्ड करेगा। अब घर के जो अर्निंग मेंबर हैं घर का वास्तु उनकी अर्निंग को अपनी तरह से सपोर्ट करेगा। यानी अगर तो उनके अनुकूल होगा वास्तु तो उनकी अर्निंग बढ़ती चली जाएगी नहीं तो अर्निंग सफर हो जाएगी।
वहीं पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह वास्तु अपने ढंग से काम करेगा। उनको डिस्ट्रक्शन भी दे सकता है या उनको लगन दे सकता है। पढ़ाई की हाउसवाइफ की हेल्थ के ऊपर यह वास्तु अलग तरह से प्रभाव करेगा। कई बार वास्तु में देखा गया है कि कई वास्तु जहां अच्छे होते हैं उन घरों का खाना भी बहुत अच्छा पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है और जहां वास्तु सही नहीं होते हैं वहां का खाना भी बड़ा बेजान या नीरस तरह का होता है।
साउथ-ईस्ट की किचन साउथ-ईस्ट की किचन हमेशा फायदेमंद नहीं होती है। कई केसेस में यह साउथ ईस्ट की किचन बहुत उल्टे असर दे जाती है।
जो साउथ-ईस्ट कोना होता है वास्तुशास्त्र के मुताबिक साउथ-ईस्ट कोना होता है। उनके 12वें घर में अगर तो मंगल के दोस्त प्लेनेट होंगे फिर तो यहां साउथ ईस्ट की किचन जो उन के लॉसेस को रोकेगी उनके घर में बरकत दे देगी। लेकिन यहीं 12वें घर में अगर मंगल के मित्र ग्रह की जगह दुश्मन ग्रह आ जाएंगे तो फिर उनके खर्चे और स्पॉइल होने शुरू हो जाएंगे, जिंदगी ब्लॉकेज की तरफ आ जाएगी।
12वें घर के बुधव वालों ने साउथ-ईस्ट में किचन बनाई तो उनके जीवन में लॉसेस होने शुरू हो गए। किसी की जन्म कुंडली में 12वें घर में केतु बहुत अच्छे होते हैं, ये मोक्ष देते हैं, ये इंसान को बहुत सुलझा हुआ बनाते हैं। लेकिन यही 12वें घर के केतु वाले भी अगर अपने साउथ-ईस्ट में किचन ले आए तो इस केतु के सारे प्रभाव जो हैं बहुत ज्यादा वीक हो जाते हैं।
इससे इनके जीवन में मंगल कार्य होने रुक जाते हैं, इनके संतान को बहुत ज्यादा कष्ट होने शुरू हो जाते हैं। जो कपलअभी अपनी फैमिली को एक्सटेंड करने की तरफ जा रहे हैं उनको बच्चा न होने की दिक्कत हो जाती है। यदि अप बच्चे हैं उनमें लगातार हेल्थ की या पढ़ाई से रिलेटेड या एटीट्यूड से संबंधित दिक्कतें काफी ज्यादा आनी शुरू हो जाती हैं।
साउथ-ईस्ट पर किचन होना दरअसल अच्छा है लेकिन केवल उनके लिए जिनके 12वें घर में मंगल के मित्र ग्रह बैठे हो और यहां पर अगर मंगल के शत्रु ग्रह बैठे हो।

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