इंदौर
भारत ने सितंबर से दिसंबर डिलीवरी के लिए चीन से रिकॉर्ड 1.5 लाख टन क्रूड सोयाबीन तेल (Soyabean Oil) के सौदे किए हैं। चीनी तेल की कीमतें दक्षिण अमेरिका की तुलना में 15–20 डॉलर प्रति टन कम हैं। भारत के लिए ट्रांजिट टाइम भी केवल 2–3 सप्ताह है, जिससे आयातकों को समय और लागत दोनों में बचत हो रही है।
चीन ने रिकॉर्ड सोयाबीन आयात के चलते बड़ी मात्रा में सोया तेल स्टॉक जमा कर लिया है, जिसे घटाने के लिए वह भारत को 1,140 डॉलर प्रति टन की प्रतिस्पर्धी दर पर सौदे कर रहा है। भारत अब तक मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से सोया तेल मंगाता था, लेकिन इस बार चीन की तरफ रुख किया है।
चीन, जो सामान्यतः आयातक रहा है, अब सरप्लस स्टॉक के कारण निर्यातक बनकर उभरा है। भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है और यदि चीनी ऑफर्स मौजूदा स्तर पर बने रहते हैं, तो आगे और खरीदारी की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए खाद्य तेलों में कोई बड़ी तेजी की स्थिति नजर नहीं आ रही है।
इधर, सस्ते खाद्य तेलों के आयात से भारतीय किसानों की परेशानी और बढ़ जाएंगी। खासतौर पर सोयाबीन किसानों के लिए आयातित तेल उनकी उपज का दाम कम करने वाला कारक बन सकता है। इधर, सोया तेल में सीमित पूछताछ रहने और सप्लाई टाइट होने के कारण भाव में मजबूत बोल गए हैं।

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